पेट की गर्मी को 10 मिनट में ठीक करने का घरेलू उपाय

पेट में गर्मी एक आम समस्या है जो कई बार चटपटा और मसालेदार भोजन करने से, जंक फूड्स खाने से या बहुत ज्यादा तीखा खाने की वजह से हो जाता है। आजकल की अनियमित जीवनशैली और खानपान की गलत आदतों के कारण भी ये समस्या हो सकती है। पेट में गर्मी के कारण जलन होती है और मुंह में छाले भी निकल आते हैं। अंग्रेजी दवाओं का प्रयोग पेट की गर्मी को बढ़ा सकता है इसलिेए इसके लिए आपको आयुर्वेदिक उपचार या आसान घरेलू नुस्खों को अपनाना चाहिए।

  1. अजवायन
    एक पैन में अजवायन सेंक कर इसका पाउडर बना लें। इसमें काला नमक मिलाएं। इसे खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ लेने से पेटी की गर्मी और एसिडिटी दूर होती है। अजवायन में मौजूद थायमॉल और काले नमक में अल्‍केलाइड्स होते हैं। इन दोनों को मिलाकर एसिडिटी दूर होती है।
  2. सौंफ का प्रयोग
    1 कप उबले हुए पानी में 1 चम्मच सौंफ मिलाएं। इसे पूरी रात ऐसे ही पड़े रहने दें। सुबह उठकर इसे छान लें। इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और इसे पी लें। इस मिश्रण को दिन में 3 बार पीने से पेट की गर्मी और एसिडिटी की समस्या दूर हो जाएगी। इससे पेट का फूलना और गैस की समस्या भी दूर हो जाती है।
  3. अदरक का रस
    अदरक का रस भी पेट की गर्मी और जलन ठीक करने में सहायक है। नींबू और शहद में अदरक का रस मिलाकर पीने से, पेट की जलन शांत होती है। इसके अलावा अदरक के रस में एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं इसलिए ये पेट में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मारता है।
  4. टमाटर और संतरे का सेवन
    कैल्शियम, फास्फोरस व विटामिन-सी से भरपूर टमाटर शरीर से जीवाणुओं को बाहर निकालने में मदद करता है। पेट की गर्मी में टमाटर खाने से लाभ मिलता है। इसका नियमित सेवन एसिडिटी और पेट की जलन से लंबे समय तक राहत दिलाता है। स्‍वाद में खट्टा होने के बावजूद टमाटर शरीर में क्षार की मात्रा बढ़ाता है। इसी तरह संतरे में मौजूद फ्रक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन शरीर में पहुंचते ही ऊर्जा प्रदान करने लगते हैं। संतरे का नियमित सेवन भी पेट की जलन और एसिडिटी से राहत पाने का उत्तम उपाय है।
  5. गुड़ का सेवन
    सीने और पेट में जलन की मुख्य वजह भोजन के पाचन के लिए बनने वाले रस की अनियमितता है। इसलिए इस समस्या से आराम के लिए आप रोजाना भोजन के बाद एक छोटा टुकड़ा गुड़ का चूसें। ध्यान रखें इसे जल्दी-जल्दी खाना नहीं है बल्कि धीरे-धीरे चूसना है। इससे पेट की पाचन क्षमता बढ़ती है और जलन में आराम मिलता है।