बांग्लादेश: 25 से भी ज्यादा सर्जरी के बाद हाथ पर फिर उगने लगे 'पेड़' | News Raftaar

बांग्लादेश के ‘ट्री मैन’ कई सर्जरियों के बाद फिर से हॉस्पिटल पहुंच गए हैं. बांग्लादेश के अबुल बाजंदर को एक दुर्लभ बीमारी है जिसमें उनके हाथ-पैर की स्किन पर पेड़ जैसी संरचना बनने लगती है.

28 साल के अबुल बाजंदर की बीमारी ने 3 साल पहले पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. हाथ-पैरों पर पेड़ की शाखाओं की तरह हुई ग्रोथ को हटाने के लिए वह कई सर्जरी से गुजर चुके हैं लेकिन उनकी बीमारी फिर से वापस आ गई है.

बाजंदर Epidermodysplasia Verruciformis नाम की बीमारी से पीड़ित है. वह पिछले दो दशक से इस बीमारी को झेलते हुए अपना जीवन गुजार रहे हैं. उनके शरीर के अधिकतर हिस्सों में पेड़ की छाल जैसी संरचना दिखती है. इन संरचनाओं की वजह से बाजंदर को हाथ-पैरों पर करीब 5 किलो वजन के बोझ को सहना पड़ता है.

यह बीमारी इम्यून सिस्टम में होने वाले एक डिफेक्ट की वजह से होती है जिसमें इंसान के HPV (human papilloma virus) का शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है और स्किन लेसियन्स और मेलानोमा स्किन कैंसर जैसी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है. स्किन ग्रोथ से जुड़ी यह बीमारी इतनी रेयर है कि पूरी दुनिया के इस बीमारी के गिने-चुने मामले ही सामने आए हैं.

डॉक्टरों के मुताबिक, 2016 के बाद से बाजंदर करीब 25 सर्जरियों से होकर गुजर चुका है लेकिन मई में उसने इलाज कराना छोड़ दिया.

ढाका मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल में बर्न ऐंड प्लास्टिक सर्जरी यूनिट के को-ऑर्डिनेटर डॉ. समंथा लाल सेन ने सीएनएन से बातचीत में बताया, यह एक बहुत ही जटिल केस है और हम इस केस में धीरे-धीरे सफल हो रहे थे लेकिन इसी बीच वह सब कुछ छोड़कर घर के लिए निकल गया. मैंने उससे कई बार वापस आकर इलाज कराने के लिए अनुरोध किया लेकिन वह नहीं आया.

उन्होंने बताया, ‘वह रविवार (20 जनवरी) को अपनी मां के साथ हॉस्पिटल आया हालांकि उसको 6 महीने पहले आ जाना चाहिए था. उसने बहुत देर कर दी है.’
डॉक्टरों ने बताया, बाजंदर की हालत अब और भी खराब हो गई है. उसके हाथ पर एक-एक इंच की छाल बढ़ आई है. उसके पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों में भी पेड़ जैसी संरचना उग आई है.

सेन की टीम अब बाजंदर के आगे के इलाज की योजना पर काम कर रही है. सेन ने बताया कि अभी उसे ठीक करने के लिए कम से कम 5-6 ऑपरेशनों की जरूरत है.
बाजंदर ने अपने पैरों में इस अजीब तरह की ग्रोथ को सबसे पहले 10 साल की उम्र में गौर किया था. धीरे-धीरे इस संरचना ने उसके पूरे हाथों को ढक लिया और उन्हें रिक्शा चलाने का काम भी बंद करना पड़ा.

2016 में सर्जरी से पहले बाजंदर ना तो खुद से खा सकता था, ना अपने दांत ब्रश कर सकता था और ना ही खुद नहा सकता था.
बाजंदर ने एक इंटरव्यू में कहा था, मैं एक सामान्य इंसान का जीवन जीना चाहता हूं. मैं केवल अपनी बेटी को अपनी गोद में उठाना चाहता हूं और उसे गले लगाना चाहता हूं.

अबुल ने जब शुरुआत में अपने शरीर पर ये ग्रोथ देखी तो उन्होंने इसे काटकर निकालने की कोशिश भी की थी. इसके बाद उन्होंने होम्योपैथी दवाएं लीं, लेकिन उनकी हालत बिगड़ती ही चली गई.

डीएमसीएच के निदेशक सामंता लाल सेन ने कहा कि इसे ‘ट्री मैन डिसीज’ से जाना जाता है. सामंता ने बताया, ‘अबुल सहित पूरी दुनिया में ऐसे 3 मामले ही हैं. इंडोनेशिया के एक गांव में इसी बीमारी से पीड़ित एक शख्स का ऑपरेशन 2008 में हुआ था.’

2017 में हुई सर्जरी के बाद सेन की हालत बहुत ठीक हो गई थी और वह खाने-लिखने जैसे काम खुद करने लगे थे लेकिन अब उसे फिर से इलाज की जरूरत पड़ेगी. 2016 में सरकार ने उसके इलाज का खर्च वहन किया था.