नवजात शिशु के अच्छे स्वास्थ्य और परवरिश के लिए ध्यान रखे ये 5 बातें | News Raftaar

नवजात बच्चों और शिशुओं की देखभाल करना आसान नहीं होता। शिशुओं को दुनिया में आने के साथ ही कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। हर मां चाहती है कि उसका शिशु स्वस्थ रहे और उसका विकास बेहतर हो। आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसे जरूरी टिप्स, जो हर मां को अपने शिशु की परवरिश के समय ध्यान देनी चाहिए।

शिशु को छूते समय रखें ध्यान
छोटे बच्‍चों की त्‍वचा बहुत ही नाजुक होती है इसलिए उनको इंफेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है इसलिए उन्हें छूने या गोद में उठाने से पहले अपने हाथ साबुन से धोएं या हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। सामान्‍य सी ठंड बच्‍चे को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य का खयाल रखें और अपने बच्‍चे को भी स्‍वस्‍थ रखें। आपके स्‍वास्‍थ्‍य का बच्‍चे की सेहत पर गहरा असर पड़ता है।

दूध पिलाते समय रखें ध्यान
अकसर ऐसा होता है कि बच्‍चा दूध पीते समय सो जाता है और कुछ ही देर में दोबारा उठकर रोने लगता है। ऐसा इसलिए होता है कि मां को लगता है कि उसका पेट भर गया और वह सो गया। परन्‍तु सही मायनों में उसका पेट नही भरता है। ऐसे में उसके तलवों को अंगुली से गुदगुदाते रहें, ताकि वह भरपेट दूध पी सके।

सुगंधित चीजों का न करें इस्तेमाल
कुछ सुगंध ऐसी होती है जिसके इस्‍तेमाल से बच्‍चों की त्‍वचा में एलर्जी या खुजली होने लगती है। इसलिए अपने बच्‍चे के लिए बहुत ज्‍यादा सुगां‍धित तेलों या लोशन का इस्‍तेमाल न करें। आप बच्‍चों की मालिश के लिए जैतून या तिल जैसे तेलों का इस्‍तेमाल कर सकती हैं।

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संगीत से खुश होते हैं बच्चे
हल्‍के संगीत से बच्‍चों को बहुत आराम मिलता है। यहां तक की रोता हुआ बच्‍चा इससे शांत हो जाता है और कई बार तो बच्‍चा इसको सुनते-सुनते सो जाता है। इसके लिए आपको कुछ गुनगुना सकते हैं और अगर आपका मन नहीं है तो किसी भी सीडी में नरम और आरामदायक गाना चला सकते हैं।

बोतल से न पिलाएं दूध
कई बार माताएं समय बचाने के चक्‍कर में सोते हुए बच्‍चे के मुंह में बोतल लगा देती है। ऐसा करने से कभी-कभी गले की नली में दूध की कुछ मात्रा रह जाती है। जिससे बच्‍चे को सांस लेने में कठिनाई होती है। इसके साथ ही बोतल से दूध पीने से बच्‍चों में पेट से जुड़ी कई बीमारियां जैसे डायरिया, दस्‍त आदि भी हो सकती है। इसलिए जहां तक हो सके कोशिश करें कि बोतल से दूध न पिलाएं।