दिवाली से पहले मोदी ने किए कई बड़े ऐलान | News Raftaar

नई दिल्ली. दिवाली से ठीक 4 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 ऐलान किए। इनसे देश में बिजनेस करना आसान हो जाएगा। नया बिजनेस शुरू करना हो या चलते बिजनेस में आ रही दिक्कतों को दूर करना हो तो मोदी के ये ऐलान काफी काम आ सकते हैं। उन्होंने ये ऐलान शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में किए। आइए, जानते हैं कि मोदी ने कौन-कौन से ऐलान किए और इन ऐलान से बिजनेस को कैसे फायदा पहुंचेगा। मोदी ने इस मौके पर 59 मिनट लोन पोर्टल का देशव्यापी लॉन्च किया। देश के किसी कोने में बैठे कारोबारियों को मात्र 59 मिनट में एक करोड़ रुपए तक के कर्ज की मंजूरी इस वक्त भी दी जा रही है।

पहला ऐलान
प्रधानमंत्री ने कहा कि आपको 59 मिनट में लोन की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई, लेकिन ये भी तो अहम है कि ब्याज किस दर पर मिल रहा है। GST पंजीकृत हर MSME को एक करोड़ रुपये तक के नए कर्ज या इन्‍क्रीमेंटल लोन की रकम पर ब्याज में 2 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।

दूसरा ऐलान
निर्यातकों को Pre-Shipment और Post Shipment की अवधि में जो लोन मिलता है उसकी ब्याज की दर में छूट को भी सरकार ने 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है।

तीसरा ऐलान
वो सारी कंपनियां जिनका टर्नओवर 500 करोड़ से ऊपर है, उनको अब Trade Receivables e- Discounting System यानि TReDS Platform पर लाना ज़रूरी कर दिया गया है। ताकि MSME’s को कैश फ्लो में दिक्कत न आए।

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चौथा ऐलान
अब तक जो नियम चला आ रहा है, वो है कि सरकारी कंपनियों को 20 प्रतिशत खरीदारी माइक्रो और स्मॉल इंटरप्राइजेज यानी सूक्ष्म और लघु उद्योगों से करना जरूरी है। अब सरकार ने इस 20 प्रतिशत की अनिवार्यता को बढ़ाकर अब 25 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। यानी अब सरकारी कंपनियां जितना सामान खरीदती हैं, उसमें अब माइक्रो और स्मॉल इंटरप्राइजेज की हिस्सेदारी और बढ़ने जा रही है।

पांचवा ऐलान
ये जो माइक्रो और स्मॉल इंटरप्राइजेज द्वारा खरीदारी की अनिवार्यता को बढ़ाया गया है, उसमें ये भी तय किया गया है कि इसमें से कुल खरीद का 3 प्रतिशत, महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित हो। यानी सरकारी कंपनियों के लिए अब ये जरूरी हो गया है कि वो अपनी खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत महिला उद्यमियों से ही खरीदें।

छठा ऐलान
अब केंद्र सरकार की सभी कंपनियों के लिए GeM की सदस्यता लेना ज़रूरी कर दिया गया है। इतना ही नहीं वो अपने सभी Vendors-MSME’s को भी इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत कराएंगी, जिससे उनके द्वारा की जा रही खरीद में भी MSMEs को अधिक से अधिक लाभ मिलेगा।

सातवां ऐलान
सातवां ऐलान Technological Upgradation के विषय से ही जुड़ी हुआ था। मोदी ने बताया कि सरकार ने फैसला लिया है कि देशभर में टूलरूम की इस व्यवस्था को और विस्तार दिया जाए। इसके लिए देशभर में 20 हब बनाए जाएंगे और Tool Room जैसे 100 स्‍पोक देशभर में स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 6 हजार करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की गई।

आठवां ऐलान
MSME सेक्टर की फार्मा कंपनियों को बिजनेस करने में आसानी हो, वो सीधे ग्राहकों तक पहुंच पाएं, इसके लिए अब क्लस्टर बनाने का फैसला लिया गया है। इन क्लस्टर्स पर 70% खर्च केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा।

नौवां ऐलान
श्रम कानूनों और 10 केन्द्रीय नियमों के तहत दिया जाना वाला रिटर्न अब आपको साल में दो बार की जगह एक बार ही देना पड़ेगा।

दसवां ऐलान
अनावश्यक जांच से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने ये फैसला किया है कि अब Inspector को कहां जाना है, इसका निर्णय सिर्फ एक Computerized Random Allotment से ही होगा और उसे 48 घंटे में अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर डालनी होगी। अब वो सिर्फ अपनी मर्जी से किसी भी जगह नहीं जा सकता। लघु उद्योगों को इंस्पेक्टर राज से मुक्ति दिलाने में ये फैसला बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। अब कोई Inspector ऐसे ही नहीं जाएगा, उससे पूछा जाएगा कि तुम क्यों उस फैक्ट्री में गए थे, क्या मकसद था।

11वां ऐलान
Environmental Clearance की प्रक्रियाओं का सरलीकरण और Self Certification को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने फैसला किया है कि वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण कानूनों के तहत MSMEs के लिए इन दोनों को एक करके, अब सिर्फ एक ही Consent अनिवार्य होगा। सरकार Self-Certification पर रिटर्न स्वीकृत करेगी। Labor Department की तरह पर्यावरण के Routine Inspection समाप्त होंगे और सिर्फ 10 प्रतिशत MSMEs का निरीक्षण होगा।

12वां ऐलान
कंपनी अधिनियम में अब तक ऐसे प्रावधान थे, उससे जुड़े ऐसे कानून थे, जिनकी वजह से छोटी-छोटी मामूली गलतियां या अनजाने में कोई उल्लंघन होने पर, कारोबारियों को क्रिमिनल, गुनहगार मान लिया जाता था। इन गलतियों की वजह से कई बार व्यापारियों के लिए जेल तक जाने की नौबत आ जाती थी। छोटी-छोटी भूल सुधारने के लिए कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ते थे। अब आपको छोटी-छोटी गलतियों को सुधारने के लिए कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा। अब अनजाने में हुए छोटे उल्लंघन के लिए आप संबंधित विभाग में जाकर, कुछ आसान प्रक्रियाओं के माध्यम से सुधार सकते हैं। इसके लिए सरकार एक अध्यादेश लेकर आयी है।