pitra-paksha

आज पितृ पक्ष का आखिरी दिन है. जिन लोगों को श्राद्ध की तिथि नहीं पता होती है वे इस दिन पितृ तर्पण कर सकते हैं, इसलिए इसे सर्वपितृ अमावस्या का दिन या पितृपक्ष अमावस्या भी कहा जाता है.

इस दिन पितरों के नाम लड्डू, इमरती, पूरियां, फल, मिठाइयां, अन्न आदि का दान किया जाता है. श्राद्ध में चना, मसूर, उड़द, सत्तू, मूली, खीरा, बासी खाना, फल या कोई भी दूसरे अन्न का उपयोग नहीं करना चाहिए.

पितृ पक्ष के अंतिम दिन ब्राह्मणों और गरीबों को, किसी जरूरतमंद को भोजन कराना शुभ माना जाता है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. ऐसा करने श्राद्ध पूरा माना जाता है.

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पितृ पक्ष के अंतिम दिन आप अन्न, दाल, सब्जियां आदि दान कर श्राद्ध पूरा कर सकते हैं.

कौओं को खिलाना भी पितरों को खिलाना ही कहा जाता है. पितरों की पसंदीदा चीजें बनाकर कौओं के लिए रखी जाती हैं. कहा जाता है कि अगर कौओं ने खा लिया तो मानो पितरों ने खा लिया.

इसके अलावा शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि जो आमान्न दान भी नहीं दे पाते हैं वो गाय को साग खिलाकर अपने पितरों का श्राद्ध पूरा कर सकते हैं.