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कहते हैं अपना बच्चा चाहे जैसा भी हो हर मां को दुनिया की सबसे ज्यादा खूबसूरत वही दिखता है, लेकिन मध्य प्रदेश की एक मां ने अपने सांवले मासूम को गोरा बनाने के चक्कर में उसे लहूलुहान कर दिया है. बताया जा रहा है कि भोपाल में रहने वाली सुधा तिवारी हबीबिया मिडिल स्कूल में टीचर हैं. साल 2005 में उनकी शादी निजी मेडिकल कॉलेज में काम करने वाले लैब टैक्नीशियन से हुई थी. शादी के बाद काफी वक्त गुजर जाने के बाद भी इन दोनों को संतान नहीं हुआ तो इन्होंने बच्चा गोद लेने का फैसला किया. इन्होंने मातृछाया शिशु गृह की मदद से देहरादून के एक शिशु गृह से हाल ही में तीन साल के बच्चे को गोद लिया था.

पूरी कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह दंपत्ति इस बच्चे को घर लेकर आए थे. परिवार में बच्चे को पाकर दोनों काफी खुश थे, लेकिन कुछ समय पहले अचानक सुधा तिवारी को बच्चे के सांवले रंग पर आपत्ति होने लगी. सुधा ने इस बात का जिक्र अपने दोस्तों और सगे-संबंधियों से भी की थी. सगे-संबंधियों ने सुधा को कई बार समझाया था कि वह बच्चे रंग पर ध्यान न दें, उसे लाड-प्यार दें, लेकिन उसके मन से बच्चे को गोरा करने का ख्याल नहीं गया.

इसी बीच किसी ने सुधा को सलाह दी कि अगर वह अपने बच्चे को पत्थर से घिसकर नहलाए तो वह एक साल में गोरा हो जाएगा. बेटे को गोरा करने की चाहत में सुधा ने बच्चे को पत्थर से रगड़कर नहलाना शुरू कर दिया. कई बार घिसने के बाद मासूम के हाथ और पेट में गहरे जख्म हो गए थे, लेकिन बच्चे को गोरा करने की चाहत में सुधा ने यह प्रताड़ना बंद नहीं किया.

बताया जा रहा है कि एक दिन सुधा तिवारी की बड़ी बहन की बेटी शोभना उनके घर आई. उसने बच्चे के शरीर पर जख्म देखकर इसका कारण पूछा तो सुधा ने चुप्पी साध ली. अगले दिन उसने बच्चे को नहलाते हुए देखा तो सारी बात उसे समझ में आ गई. इसके बाद शोभना ने बाल कल्याण समिति में इसकी शिकायत की, जिसके बाद बच्चे को वहां से निकालकर शिशु गृह में रखवा दिया गया है.

बाल कल्याण समिति ने आरोपी मां-पिता के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया है. मुकदमा में मातृछाया संस्था और डिस्ट्रिक चाइल्ड प्रोटेक्शन देहरादून को भी आरोपी बनाया गया है. इस घटना के बारे में इलाके में जिस किसी को पता लग रहा है वह दंग है. लोगों के जेहन में सवाल उठ रहे हैं कि एक मां इतनी क्रूर कैसे हो सकती है. साथ ही कई लोग ये भी कह रहे हैं कि शोभा पेशे से टीचर हैं, इसके बावजूद उन्होंने बच्चे के साथ इतना कठोर बर्ताव कैसे किया. ये भी बातें हो रही हैं कि अनाथ बच्चे के शरीर का जख्म भले ही कुछ दिनों में भर जाएगा, लेकिन शायद उसके दिल पर लगी चोट ताउम्र बनी रहेगी. उसके मन में यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि क्या मां रंग देखकर प्यार करती हैं.