atm hack

अक्सर खबरें आती हैं कि एटीएम को हैक करके अकाउंट से पैसा निकाल लिया जाता है. आरबीआई और बैंक इसकी सुरक्षा को लेकर लगातार कुछ न कुछ अपडेट जारी करते हैं. लेकिन, फिर भी हैकर्स दूर बैठे लोगों के अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर देते हैं. ATM हैकिंग के नए-नए मामले सामने आते रहते हैं. सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि कई देशों में इस तरह की हैकिंग आम बात है. कुछ समय पहले जर्मनी के हैमबर्ग में हुई Chaos Computing Congress में दो विशेषज्ञों ने इसकी जानकारी दी थी. उनके हिसाब से ATM मशीन में सिर्फ एक छेद कर पेन ड्राइव के जरिए सारा पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है.

पेन ड्राइव लगाकर आसानी से होती है हैकिंग
Chaos Computing Congress में बताई गई ट्रिक्स के मुताबिक ATM मशीन में पेन ड्राइव लगाकर उसे हैक करने का काम बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है. इस काम के लिए पेन ड्राइव को ATM मशीन से जोड़ना होता है. पेन ड्राइव में पहले से ही एक मालवेयर प्रोग्राम (खास तरह का कम्प्यूटर वायरस जो सिस्टम में गड़बड़ी करने के लिए बनाया जाता है) होता है. इस मालवेयर की मदद से 12 अंकों का कस्टम कोड मशीन में डाला जाता है. इसके बाद कम्प्यूटर प्रोग्राम अपना काम करना शुरू कर देता है.

कोड डालने के तुरंत बाद ATM की स्क्रीन पर एक मैसेज दिखता है. इस मैसेज के दिखते ही ATM मशीन पर पूरी तरह से हैकर्स का कब्जा हो जाता है. मालवेयर प्रोग्राम की मदद से हैकर्स को यह भी पता चल जाता है कि ATM में कितने पैसे हैं और उन्हें कैसे ट्रांसफर किया जा सकता है. यूरोपियन देशों में इस तरह की ATM हैकिंग बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है.

ATM पासवर्ड हैकिंग से बचने के टिप्स
ATM पिन की सुरक्षा को लेकर यूजर्स अक्सर बहुत लापरवाह रहते हैं. वैसे तो ATM हैकिंग को रोकने के लिए बहुत हाई-टेक होना जरूरी है, लेकिन ATM पिन की सुरक्षा काफी हद तक यूजर्स के हाथ में रहती है. सबसे बड़ी गलती तो यूजर्स की ATM पिन चेंज ना करना होती है.

  • ATM कार्ड और पिन को एक साथ ना रखें.
  • ATM पिन को टेक्स्ट मैसेज या ईमेल के जरिए ना भेजें.
  • अगर आप अपने ATM का पिन लगातार चार बार गलत प्रेस करेंगे तो ATM कार्ड मशीन में फंस जाएगा.
  • ATM के अंदर किसी अन्य गैजेट, चार्जर, पेन ड्राइव, मशीन में होल जैसी चीजों को चेक कर लें.

ऑनलाइन बैंकिंग में सुरक्षित रहने के टिप्स
बैंकों अक्सर देते हैं सुझाव
सभी बैंक अपने ग्राहकों को सुरक्षित ऑनलाइन बैंकिंग के कई सुझाव देते हैं लेकिन, इसके बावजूद भी कई लोग फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं. इंटरनेट पर हर पल कई हैकर्स लगातार दूसरों के बैंक अकाउंट पर नजर बनाए रहते हैं और लोगों की एक छोटी सी गलती करने का बेसब्री से इंतजार करते रहते हैं.

फिशिंग अलर्ट
फिशिंग एक टेक्निकल शब्द है, जिसे किसी घपले या घोटाले के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जब कोई फ्रॉड व्यक्ति या संस्था आपको फर्जी ई-मेल भेजती है तो इसे फिशिंग कह सकते हैं. ये ई-मेल बिल्कुल विश्वसनीय जैसे लगते हैं और इसके जरिए आपका बैंक अकाउंट नंबर, पासवर्ड और कई व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा सकती है. ऐसे ई-मेल से हमेशा सावधान रहें और इनमें दिए गए लिंक्स (links) पर क्लिक न करें.

बैंक संबंधित जानकारी रखें गुप्त
इंटरनेट के प्रयोग के समय किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें. किसी भी लुभावने ऑफर को देखकर उसपर क्लिक करना और उसमें दिए गए निर्देशों पर अमल करना खतरे का काम होता है. इससे आपकी कई व्यक्तिगत जानकारियां फ्रॉड लोगों तक पहुंच जाती है.

लॉक आइकन पर रखें नजर
अपने बैंक अकाउंट के आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल किसी भी वेबसाइट पर तभी करें जब ऊपर यूआरएल (url) पर लॉक का चिन्ह दिखाई दे. ये आपके पासवर्ड को गुप्त रखता है. इस चिन्ह से पता चलता है की जिस वेबसाइट पर आप काम कर रहे हैं वो सुरक्षित है.

लॉगआउट करना न भूलें
जब भी आप इंटरनेट से अपने पैसों की लेन-देन करें उसके तुरंत बाद अपना अकाउंट लॉगआउट करना न भूलें. आपके अकाउंट के खुले रहने पर दूसरा व्यक्ति उसका गलत इस्तेमाल कर सकता है.

स्मार्टफोन कितने हैं सुरक्षित
अगर आपके पास बैंक जाने या कम्यूटर पर बैंकिंग करने का टाइम नहीं है तो अपने फोन से भी ऑनलाइन बैंकिंग सुरक्षित है. अपने फोन को हमेशा लॉक रखें और पासवर्ड किसी दूसरे व्यक्ति से शेयर न करें.

एंटीवायरस रखें अपडेट
ऑनलाइन बैंकिंग के इस्तेमाल के लिए अपने मोबाइल या कम्प्यूटर पर एंटीवायरस हमेशा अपडेट रखें. इसके साथ ही सबसे लेटेस्ट एंटीवायरस का इस्तेमाल करना भी जरूरी है.

पासवर्ड के अलावा और क्या है जरूरी?
पर्सनल जानकारियां हैक होने से बचाने के लिए सिर्फ पासवर्ड ही काफी नहीं है. अगर कोई साइट अतिरिक्त सिक्युरिटी फीचर्स ऑफर कर रही है तो उसे भी ट्राई करें. कई बैंक साइट्स या महत्वपूर्ण साइट्स जैसे गूगल और एप्पल सिक्युरिटी फीचर्स में टू-फैक्टर ऑथेन्टिकेशन भी ऑफर करती हैं. कुछ मामलों में सेकंड ऑथेन्टिकेशन जरूरी होता है तभी आप किसी दूसरे कम्प्यूटर से लॉग-इन कर सकते हैं.