lahsun ki kheti
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लहसुन एक ऐसी चीज है, जो जिसका इस्तेमाल अधिकांश घरों में किया जाता है। मसाल के साथ ही औषधीय गुणों के कारण भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। आंधप्रदेश, उत्तरप्रदेश, मद्रास और गुजरात जैसे राज्यों में इसकी ज्यादा पैदावार होती है। साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट में यह भी सामने आ चुका है कि लहसुन दिल के मरीजों के लिए भी दवाई से कम नहीं। कई राज्यों में सरकार सीधे किसानों से लहसुन खरीद रही है। मप्र में 3200 रुपए क्विंटल में सरकार लहसुन की खरीद कर रही है। आज हम बता रहे हैं आप इसकी खेती कर कैसे लाखों रुपए का मुनाफा कमा सकते हैं।

किस तरह की मिट्टी में लगता है
वैसे तो लहसुन को कई तरह की मिट्टी में लगाया जा सकता है लेकिन कमर्शियल प्रोडक्शन के लिए सेंडी सॉइल (रेतीली मिट्टी), सिल्ट सॉइल या क्ले लोम इसके बेस्ट मानी जाती हैं। मिट्टी फर्टाइल (उपजाऊ) और रिच ऑर्गेनिक वाली होना चाहिए। मिट्टी का अच्छी तरह से सूखा होना और मॉइश्चर होल्ड करने की क्षमता रखने वाला भी होना चाहिए।

कैसा क्लाइमेट जरूरी
लहसुन टाइप-1 वाले क्लाइमेट में अच्छी ग्रोथ करते हैं। यानी मई से अक्टूबर और नवंबर से अप्रैल के बीच इसे लगाना सही होता है। हालांकि बहुत ज्यादा बारिश वाले इलाके में लहसुन को लगाना सही नहीं होता। ज्यादा पानी लहसुन के लिए सही नहीं होता।

जमीन कैसे तैयार करें
– मक्का, सोयाबीन के लिए जिस तरह से जमीन तैयार की जाती है, वैसे ही लहसुन के लिए भी तैयार होती है।
– बुवाई (Swoing) के पहले दो से तीन बार खेत में गहरी जुताई (Tillage) करें।
– इसके बाद खेत को बराबर करें। क्यारियां और सिंचाई की नालियां बना लें।
– अच्छी उपज के लिए डेढ़ से दो क्विंटल कलियां प्रति एकड़ डालनी चाहिए।
– लहसुन के लिए न ही बहुत अधिक गर्मी अच्छी होती है और न ही बहुत अधिक ठंड।

कैसे करें बुवाई
– बुवाई के लिए डिजीज से फ्री हेल्दी बल्ब (कंद) को उपयोग में लेना चाहिए।
– 1 एकड़ में 400 से 700 किलो बल्ब की जरूरत होती है। यह बल्ब के साइज और बुवाई के डिस्टेंस पर भी डिपेंड करता है।
– क्यारी का डिस्टेंस 15 सेंटीमीटर तक रखें।
– दो पौधों के बीच कम से कम 7.5 सेंटीमीटर का डिस्टेंस रखें।
– बुवाई करते समय गहराई 3 से 5 सेंटीमीटर तक रखनी चाहिए।
– हर 10 से 15 दिन में सिंचाई करना चाहिए।

गोबर खाद मिलाएं
– खेत को तैयार करते समय 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर गोबर खाद खेत में मिला दें। क्योंकि जैविक खाद लहसुन का प्रोडक्शन बढ़ा देता है।
– इसके अलावा 60 किलो फास्फोरस, 100 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर भी बुवाई के समय डालना चाहिए।
– बुवाई के लिए अच्छी किस्म के बड़े आकार वाले कंदों (Tuber) की कलियों का इस्तेमाल करें।
– यदि मिट्टी में मॉइश्चर की कमी है तो प्लांटिंग के एक दो दिन पहले खेत में सिंचाई करें।
– ऐसे में यदि मिट्टी ज्यादा गीली हो जाती है तो फिर उसे ड्राय होने दें। जब पैर मिट्टी में अंदर जाने लगें, तब समझ लें मिट्टी में पर्याप्त मॉइश्चर है।
– कितनी बार सिंचाई करना है, यह मिट्टी के नेचर पर डिपेंड करता है।

प्लांटिंग का परफेक्ट टाइम
– प्लांटिंग का परफेक्ट टाइम मिड अक्टूबर से मिड नवंबर के बीच माना जाता है।
– कलियों की बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
– पकने पर जब पत्तियां सूखने लगे तब सिंचाई बंद कर लें।

चार से 5 माह की ड्यूरेशन में फसल तैयार
– जिस एरिया में पानी भरता हो उसमें पैदा हुए कंद अधिक समय तक नहीं रखे जा सकते।
– लहसुन खुदाई के वक्त जमीन में थोड़ी नमी रहनी चाहिए। इससे कंद आसानी से बाहर आ जाते हैं।
– कंदों को पत्तियों सहित निकालने के तुरंत बाद इस पर लगी मिट्टी को उतार दें।
– छोटे-छोटे बंडल बनाकर इन्हें छावं में सुखाना चाहिए। सूखी पत्तियां अलग कर देना चाहिए।
– कंदों को समय-समय पर पलटना भी जरूरी है।
– लहसुन की फसल साढ़े चार से 5 माह की ड्यूरेशन में तैयार हो जाती है। पत्तियां जब यलो या ब्राउन कलर की नजर आने लगें, तब समझ लें कि फसल हार्वेस्ट के लिए तैयार है।